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Wednesday, 26 September 2018

नवरात्रि में कलश स्थापना कैसे करें?

नवरात्रि में कलश स्थापना कैसे करें?





नवरात्रि हिन्दुओं का पवित्र त्यौहार है जिसे पुरे भारत में समान उत्साह के साथ मनाया जाता है। दुर्गा के नौ स्वरूपों को समर्पित यह पर्व नौ दिनों तक मनाया जाता है जिसमे पहले दिन यानी प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापना की जाती है। जिसका इस पर्व में खास महत्व होता है। शास्त्रों में भी नवरात्रि के दौरान कलश स्थापना का खास महत्व बताया गया है। जिनके अनुसार कलश स्थापना (घटस्थापना) नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त और सही समय में करनी चाहिए। माना जाता है सही समय में की गयी कलश स्थापना से देवी शक्ति का आशीर्वाद मिलता है जबकि गलत समय में की गयी घटस्थापना का कोई लाभ नहीं मिलता।
बता दें अमावस्या और रात्रि के समय घटस्थापना करना निषेध होता है। कलश स्थापना के लिए सबसे शुभ समय प्रातःकाल का होता है जब पहले प्रहर में प्रतिपदा तिथि प्रबल हो। अगर ऐसा कोई मुहूर्त न मिले तो कलश स्थापना अभिजित मुहूर्त  में भी की जा सकती है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के दौरान कलश स्थापना करना शुभ नहीं माना जाता लेकिन अगर आपकी रीती रिवाजों में इस दौरान पूजा होती है तो आप उस हिसाब से पूजन कर सकते है। यहाँ हम आपको नवरात्रि के दौरान कलश स्थापना की सही विधि बताने जा रहे है।

नवरात्रि कलश स्थापना :

कलश स्थापना के लिए आवश्यक सामग्री :-

  • जौ बोने के लिए मिटटी का पात्र
  • साफ़ मिट्टी
  • मिटटी का एक छोटा घडा
  • कलश को ढकने के लिए मिट्टी का एक ढक्कन
  • गंगा जल
  • सुपारी
  • 1 या 2 रूपए का सिक्का
  • आम की पत्तियां
  • अक्षत / कच्चे चावल
  • मोली / कलावा / रक्षा सूत्र
  • जौ (जवारे)
  • इत्र (वैकल्पिक)
  • फुल और फुल माला
  • नारियल
  • लाल कपडा / लाल चुन्नी
  • दूर्वा घास

कलश स्थापना विधि :-

नवरात्रि में कलश स्थापना देव-देवताओं के आह्वान से पूर्व की जाती है। कलश स्थापना करने से पूर्व आपको कलश और खेतरी को तैयार करना होगा जिसकी सम्पूर्ण विधि नीचे दी गयी है।



  1. सबसे पहले मिट्टी के बड़े पात्र में थोड़ी सी मिट्टी डालें। और उसमे जवारे के बीज डाल दें।
  2. अब इस पात्र में दोबारा थोड़ी मिटटी और डालें। और फिर बीज डालें। उसके बाद सारी      मिट्टी पात्र में दाल दें और फिर बीज डालकर थोडा सा जल डालें।
  3. (ध्यान रहे इन बीजों को पात्र में इस तरह से लगाएं की उगने पर यह ऊपर की तरफ उगें। यानी बीजों को खड़ी अवस्था में लगायें। और ऊपर वाली लेयर में बीज अवश्य डालें।)
  4. अब कलश और उस पात्र की गर्दन पर मोली बांध दें। साथ ही तिलक भी लगाएं।
  5. इसके बाद कलश में गंगा जल भर दें।
  6. इस जल में सुपारी, इत्र, दूर्वा घास, अक्षत और सिक्का भी दाल दें।
  7. अब इस कलश के किनारों पर 5 अशोक के पत्ते रखें। और कलश को ढक्कन से ढक दें।
  8. अब एक नारियल लें और उसे लाल कपडे या कल चुन्नी में लपेट लें। चुन्नी के साथ इसमें कुछ पैसे भी रखें।
  9. इसके बाद इस नारियल और चुन्नी को रक्षा सूत्र से बांध दें।
  10. तीनों चीजों को तैयार करने के बाद सबसे पहले जमीन को अच्छे से साफ़ करके उसपर मिट्टी का जौ वाला पात्र रखें। उसके ऊपर मिटटी का कलश रखें और फिर कलश के ढक्कन पर नारियल रख दें।

आपकी कलश स्थापना सम्पूर्ण हो चुकी है। इसके बाद सभी देवी देवताओं का आह्वान करके विधिवत नवरात्रि पूजन करें। इस कलश को आपको नौ दिनों तक मंदिर में ही रखे देने होगा। बस ध्यान रखें की खेतरी में सुबह शाम आवश्यकतानुसार पानी डालते रहें।

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