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Sunday, 2 December 2018

श्री रामायण जी की आरती


श्री रामायण जी की आरती


आरती श्री रामायण जी की । कीरति कलित ललित सिय पी की ॥
गावत ब्रहमादिक मुनि नारद । बाल्मीकि बिग्यान बिसारद ॥
शुक सनकादिक शेष अरु शारद । बरनि पवनसुत कीरति नीकी ॥ 1॥
आरती श्री रामायण जी की........॥
गावत बेद पुरान अष्टदस , छओं शास्त्र सब ग्रंथन को रस ॥
मुनि जन धन संतान को सरबस ,सार अंश सम्मत सबही की ॥ 2॥
आरती श्री रामायण जी की........॥
गावत संतत शंभु भवानी , अरु घटसंभव मुनि बिग्यानी ॥
ब्यास आदि कबिबर्ज बखानी , कागभुशुंडि गरुड़ के ही की ॥ 3॥
आरती श्री रामायण जी की........॥
कलिमल हरनि बिषय रस फीकी , सुभग सिंगार भगति जुबती की ॥
दलनि रोग भव मूरि अमी की , तात मातु सब बिधि तुलसी की ॥ 4॥
आरती श्री रामायण जी की........॥

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