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Sunday, 2 December 2018

श्री शिव जी की आरती



श्री शिव जी की आरती


जय शिव ओंकारा, हर जय शिव ओंकारा । 
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव ओंकारा ।
एकानन चतुरानन पंचानन राजे । 
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव ओंकारा । 
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे । 
त्रिगुण रूप निरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव ओंकारा । 
अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी । 
चंदन मृगमद सोहे भोले शुभकारी ॥ ॐ जय शिव ओंकारा । 
श्वेतांबर पीतांबर बाघंबर अंगे । 
सनकादिक ब्रह्मादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव ओंकारा । 
कर के मध्य कमंडल चक्र त्रिशूलधरता । 
जगकर्ता जगभर्ता जगपालनकर्ता ॥ ॐ जय शिव ओंकारा । 
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका । 
प्रणवाक्षर के मध्‍ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव ओंकारा । 
पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा । 
भांग धतूरे का भोजन, भस्मी में वासा ॥ ॐ जय शिव ओंकारा । 
काशी में विश्वनाथ विराजत, नंदी ब्रह्मचारी । 
नित उठ भोग लगावत, महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव ओंकारा । 
त्रिगुण शिवजी की आरति जो कोइ नर गावे । 
कहत शिवानंद स्वामी सुख संपति पावे ॥ ॐ जय शिव ओंकारा ।
जय शिव ओंकारा, ॐ जय शिव ओंकारा । 
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव ओंकारा ।

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