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Thursday, 21 February 2019

प्रदोष व्रत पूजा से मिलती है सुख-समृद्धि, जानिए इस व्रत का महत्व

प्रदोष व्रत पूजा से मिलती है सुख-समृद्धि, जानिए इस व्रत का महत्व


हिन्दू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व होता है। प्रदोष व्रत में भगवान शिव की उपासना की जाती है हिन्दू कैलेंडर के अनुसार प्रदोष व्रत त्रयोदशी के दिन रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव एवं माता पार्वती की पूजा की जाती है। प्रत्येक महीने में दो प्रदोष व्रत होते हैं। एक व्रत शुक्ल पक्ष में पड़ता है वहीं दूसरा कृष्ण पक्ष में त्रयोदशी की तिथि पर।

सोमवार को आने वाले प्रदोष व्रत को सोम प्रदोष या चन्द्र प्रदोष भी कहा जाता है। वहीं मंगलवार को आने वाले प्रदोष व्रत को भौम प्रदोष कहा जाता है और शनिवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को शनि प्रदोष कहते है। इस बार शुक्रवार को प्रदोष व्रत है। शुक्रवार के दिन प्रदोष व्रत रखने से सुख और सौभाग्य में वृद्दि होती है।
प्रदोष व्रत रखना बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है।ऐसी मान्यता है इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से सभी पापों का नाश होता है एवं मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है।  प्रदोष व्रत रखने और दो गायों दान करने से भी यही सिद्धी प्राप्त होती है।
प्रदोष व्रत रखने वालों को बिना जल पिए व्रत रखना होता है। सुबह स्नान करके भगवान शंकर, पार्वती और नंदी को पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराकर बेल पत्र, गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, फल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची भगवान को चढ़ाएं। शाम के समय पुन: स्नान करके इसी तरह शिवजी की पूजा करें। जिसमें भगवान शिव की सोलह सामग्री से पूजा करें।

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