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Tuesday, 16 April 2019

गुड फ्राइडे 2019 - क्यों मनाया जाता है 'गुड फ्राइडे', जानें इससे जुड़ी मान्यतांए

गुड फ्राइडे 2019 - क्यों मनाया जाता है 'गुड फ्राइडे', जानें इससे जुड़ी मान्यतांए



गुड फ्राइडे का नाम सुनने मात्र से ऐसा लगता है कि यह एक इस दिन कोई अच्छा कार्य किया गया होगा। लेकिन इतिहास का इसके बारे में कुछ और ही कहना है।इस बार यह पर्व 19 अप्रैल 2019 को मनाया जाएगा। यही वह दिन है जब दुनिया को मानवता का उपदेश देने वाले, सहनशीलता का पाठ पढ़ाने वाले, क्षमा करने की प्रेरणा देने वाले ईसा मसीह जिन्हें ईसाई ईश्वर का पुत्र मानते हैं। वही ईसा मसीह, जीसस क्राइट जिन्हें उनके मानवीय और प्रेम के संदेश देने के बदले में तत्कालीन धार्मिक कट्टरपंथियों, कर्मकांडियों ने अपने लिये ख़तरा समझा और रोम के शासक से शिकायत कर उसे सूली पर टंगवाया। लेकिन ईश्वर के इस पुत्र ने तब भी प्रभु से यही प्रार्थना की कि हे ईश्वर इन्हें माफ करना ये नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हैं। उनके इस बलिदान के दिन को ही गुड फ्राइडे के रुप में मनाया जाता है। यह दिवस गुड फ्राइडे ईस्टर रविवार से दो दिन पहले मनाया जाता है। इस पर्व को होली फ्राइडे, ब्लैक फ्राइडे या ग्रेट फ्राइडे इत्यादि नामों से भी जाना जाता है।

गुड फ्राइडे का निर्धारण 

मान्यताओं के अनुसार हिंदू कैलेंडर के चंद्र मास की तरह ही गिरजाघर संबंधी चंद्र मास भी होता है जो नये प्रतिप्रदा से ही आरंभ होता है। माना जाता है कि 8 मार्च से 5 अप्रैल के बीच जो नव चंद्रमा दिखाई देता है उससे ईसाई धर्म के अनुसार उस समय पास्का विषयक चंद्र मास का आरंभ होता है। इसी मास के तीसरे रविवार को ईस्टर यानि ईसा के पुनरोत्थान यानि पुन: जीवित होने का पर्व मनाया जाता है जिसे लगभग 40 दिनों तक मनाया जाता है। ईस्टर से पहले पड़ने वाले शुक्रवार को ही गुड फ्राइडे कहा जाता है।

कैसे मनाते हैं गुड फ्राइडे 

ईसाई धर्म को मानने वाले लोगों के लिए यह दिन बेहद खास होता है। इस दिन उपवास रखने की भी परंपरा है।लोग इस दिन ईसा के उपदेशों सुनते हैं और अपने जीवन में उतारने का प्रयास करते हैं।ईसा मसीह जिन्हें यीशु के नाम से भी जाना जाता है। ईसा को परमेश्वर का पुत्र मानकर पूजा जाता है। लोग उनके बताये प्रेम, सत्य और विश्वास के मार्ग पर चलने का प्रण लेते हैं। चर्चों में प्रार्थनाओं का आयोजन होता है। अधिकतर जगहों पर इस दिन अवकाश भी घोषित होता है। कुछ स्थानों पर लोग काले कपड़े धारण कर यीशु के बलिदान दिवस पर शोक भी व्यक्त करते हैं। यीशु को याद करते हुए लोग चर्चों में मोमबत्ती लगाकर प्रार्थना करते हैं।

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