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Sunday, 5 May 2019

अक्षय तृतीया 2019 - जानें अक्षय तृतीया का अर्थ,महत्त्व,कथा,पूजन विधि,उपाय शुभ मुहूर्त

अक्षय तृतीया 2019 - जानें अक्षय तृतीया का अर्थ,महत्त्व,कथा,पूजन विधि,उपाय शुभ मुहूर्त

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अक्षय का अर्थ होता है “जो कभी खत्म ना हो” और इसीलिए एसा कहा जाता है, कि अक्षय तृतीया वह तिथि है जिसमें सौभाग्य और शुभ फल का कभी क्षय नहीं होता. इस दिन होने वाले कार्य मनुष्य के जीवन को कभी न खत्म होने वाले शुभ फल प्रदान करते हैं. इसलिए यह कहा जाता है, कि इस दिन मनुष्य जीतने भी पुण्य कर्म तथा दान करता है उसे, उसका शुभ फल अधिक मात्रा में मिलता है और शुभ फल का प्रभाव कभी खत्म नहीं होता है.

अक्षय तृतीया क्यूँ मनाई जाती है?

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अक्षय तृतीया हिन्दू धर्म में मनाया जाने वाला बहूत ही पावन पर्व है. सभी हिन्दू इसे बहूत ही हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं. हिन्दू धर्म के साथ अक्षय तृतीया का दिन जैन धर्म के लिए भी महत्वपूर्ण होता है

अक्षय तृतीया की पूजन विधि

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इस दिन भगवान विष्णु तथा लक्ष्मी की पूजा का महत्व है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है तथा विष्णुजी को चावल चढ़ाना विशेष लाभकारी होता हैं.विष्णु तथा लक्ष्मीजी की आराधना कर उन्हें तुलसी के पत्तों के साथ भोजन अर्पित किया जाता है. सभी विधि विधान पूर्णा कर भगवान की धूप-बत्ती से आरती की जाती है.

गर्मी के मौसम में आने वाले आम तथा इमली को भगवान को चढ़ा कर पूरे वर्ष अच्छी फसल तथा वर्षा के लिए आशीर्वाद मांगा जाता है. कई जगह इस दिन मिट्टी से बने घड़े पानी भर कर उसमें केरी (कच्चा आम), इमली तथा गुड़ को पानी में मिला कर भगवान को चढ़ाया जाता है.

अक्षय तृतीया का महत्व

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यह दिन सभी शुभ कार्य के लिए सर्वश्रेष्ठ है. अक्षय तृतीया के दिन विवाह होना अत्यंत ही शुभ माना जाता है. जिस प्रकार इस दिन पर दिये गए दान का पुण्य कभी खतम नहीं होता, उसी प्रकार इस दिन होने वाले विवाह में भी पति –पत्नी के बीच प्रेम कभी खत्म नहीं होता. इस दिन विवाह करने वाले जन्मों जन्मों तक साथ निभाते हैं.

विवाह के अलावा सभी मांगलिक कार्य जैसे, उपनयन संस्कार, घर आदि का उद्घाटन, नया व्यापार डालना, नए प्रोजेक्ट शुरू करना भी शुभ माना जाता है. इस दिन कई लोग सोना तथा गहने खरीदना भी शुभ मानते हैं. इस दिन व्यापार आदि शुरू करने से मनुष्य को हमेशा तरक्की मिलती है, तथ उसके भाग्य में दिनों दिन शुभ फल की बढ़ोत्तरी होती है.

अक्षय तृतीया की कथा एवं उसको सुनने का महत्व

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अक्षय तृतीया की कथा सुनने तथा विधि से पूजा करने से बहुत लाभ होता है. इस कथा का पुराणों में भी महत्व है. जो भी इस कथा को सुनता है, विधि से पूजन एवं दान आदि करता है, उसे सभी प्रकार के सुख, संपत्ति, धन, यश, वैभव की प्राप्ति होती है. इसी धन एवं यश की प्राप्ति के लिए वैश्य समाज के धर्मदास नामक व्यक्ति ने अक्षय तृतीया का महत्त्व जाना.

बहुत पुरानी बात है, धर्मदास अपने परिवार के साथ एक छोटे से गाँव में रहता था. वह बहुत ही गरीब था. वह हमेशा अपने परिवार के भरण – पोषण के लिए चिंतित रहता था. उसके परिवार में कई सदस्य थे. धर्मदास बहुत धार्मिक पृव्रत्ति का व्यक्ति था. एक बार उसने अक्षय तृतीया का व्रत करने का सोचा. अक्षय तृतीया के दिन सुबह जल्दी उठकर उसने गंगा में स्नान किया. फिर विधिपूर्वक भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना एवं आरती की. इस दिन अपने सामर्थ्यानुसार जल से भरे घड़े, पंखे, जौ, सत्तू, चावल, नमक, गेंहू, गुड़, घी, दही, सोना तथा वस्त्र आदि वस्तुएँ भगवान के चरणों में रख कर ब्राह्मणों को अर्पित की. यह सब दान देख कर धर्मदास के परिवार वाले तथा उसकी पत्नी ने उसे रोकने की कोशिश की . उन्होने कहा कि अगर धर्मदास इतना सब कुछ दान में दे देगा, तो उसके परिवार का पालन –पोषण कैसे होगा. फिर भी धर्मदास अपने दान और पुण्य कर्म से विचलित नहीं हुआ और उसने ब्राह्मणों को कई प्रकार का दान दिया. उसके जीवन में जब भी अक्षय तृतीया का पावन पर्व आया, प्रत्येक बार धर्मदास ने विधि से इस दिन पूजा एवं दान आदि कर्म किया. बुढ़ापे का रोग, परिवार की परेशानी भी उसे, उसके व्रत से विचलित नहीं कर पायी.

इस जन्म के पुण्य प्रभाव से धर्मदास ने अगले जन्म में राजा कुशावती के रूप में जन्म लिया. कुशावती राजा बहुत ही प्रतापी थे. उनके राज्य में सभी प्रकार का सुख, धन, सोना, हीरे, जवाहरात, संपत्ति की किसी भी प्रकार से कमी नहीं थी. उनके राज्य में प्रजा बहुत सुखी थी. अक्षय तृतीया के पुण्य प्रभाव से राजा को वैभव एवं यश की प्राप्ति हुई,  लेकिन वे कभी लालच के वश नहीं हुए एवं अपने सत्कर्म के मार्ग से विचलित नहीं हुए. उन्हें उनके अक्षय तृतीया का पुण्य सदा मिलता रहा.

जैसे भगवान ने धर्मदास पर अपनी कृपा की वैसे ही जो भी व्यक्ति इस अक्षय तृतीया की कथा का महत्त्व सुनता है और विधि विधान से पूजा एवं दान आदि करता है, उसे अक्षय पुण्य एवं यश की प्राप्ति होती है.

2019 में अक्षय तृतीया का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त कब है?

यह सभी मुहूर्तों में अत्यंत ही शुभ माना जाता है. विद्वान पंडितों तथा धर्म को जानने वाले व्यक्ति कहते हैं, कि इस दिन शुभ कार्य करने के लिए हमें पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं, अक्षय तृतीया हर पल हर घड़ी शुभ होता है. इस वर्ष अक्षय तृतीया 7 मई 2019, दिन मंगलवार को है. अक्षय तृतीया पूजा का मुहूर्त 05:54 से 12:24 तक कुल 6 घंटे 29 मिनट के लिए है.

अक्षय तृतीया के उपाय

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अच्छी नियत से दी गयी हर वस्तु के दान का पुण्य लगता है. इस दिन घी, शक्कर, अनाज, फल, सब्जी, इमली, कपड़े, सोना, चाँदी आदि का दान देना चाहिए.

इस दिन छोटे से छोटे दान का भी बहूत महत्व है. फिर भी एक दिलचस्प मान्यता के अनुसार अक्षय तृतीया पर इलेक्ट्रॉनिक्स सामान देने का भी महत्व है. इस दिन कई लोग पंखे, कूलर आदि का दान करते हैं. दरअसल इसकेव पीछे यह धारणा है की यह पर्व गर्मी के दिनों में आता है, और इसलिए गर्मी से बचन्वे के उपकरण दान में देने से लोगों का भला होगा और दान देने वालों को पुण्य मिलेगा.

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