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Saturday, 27 July 2019

कामिका एकादशी 2019 शुभ मुहूर्त ,पूजा विधि ,महत्त्व और व्रत कथा

कामिका एकादशी 2019 शुभ मुहूर्त ,पूजा विधि ,महत्त्व और व्रत कथा 





सावन के महीने में कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को कामिका एकादशी का व्रत पूजन किया जाता है. इस साल कामिका एकादशी का व्रत 28 जुलाई 2019 को किया जाएगा. कामिका एकादशी के दिन पीले रंग का काफी बड़ा महत्व बताया जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा पीले फल-फूल से की जाती है.

सभी एकादशी व्रतों में से कामिका एकादशी को भगवान विष्णु का उत्तम व्रत माना जाता है क्योकि यह भगवान शिव के पावन महीने श्रावण में आता है. कामिका एकादशी का व्रत विधान करके सभी लोग अपने कष्टों से मुक्त हो सकते हैं. यह व्रत रखने से व्यक्ति के मन की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं.

कामिका एकादशी : तिथि व मुहूर्त एवं पारण समय-

कामिका एकादशी व्रत तिथि- 28 जुलाई 2019, रविवार।

एकादशी तिथि का समय- 27 जुलाई 2019 को 19:46 मिनट से प्रारंभ होकर 28 जुलाई 2019 को 18:49 मिनट पर एकादशी तिथि समाप्त होगी।

पारण (व्रत तोड़ने का) समय- 29 जुलाई 2019 को सुबह 05:45 से 08:26 तक रहेगा।

पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय- शाम 17:09 मिनट।

कामिका एकादशी पूजा विधि 

-कामिका एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा उससे एक दिन पहले दशमी तिथि की रात्रि से ही व्रत नियम को लेकर शुरू हो जाती है.

-दशमी तिथि के दिन सूर्यास्त के बाद भोजन ग्रहण न करें केवल फलों का ही सेवन करें.

-दशमी तिथि की रात को अगर संभव हो तो भगवान विष्णु के किसी भी मंत्र का जाप अवश्य करें.

- सुबह सूर्योदय से पहले उठकर अपने स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान कर लेना चाहिए. पूजा करते समय साफ कपड़े पहनकर विष्णु भगवान का ध्यान करना चाहिए.

- पूर्व दिशा की तरफ एक पटरे पर पीला रेशमी कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की फोटो को स्थापित करें.

-धूप-दीप जलाएं और कलश स्थापित करें.

- भगवान विष्णु को अपने सामर्थ्य के अनुसार फल-फूल, पान, सुपारी, नारियल, लौंग आदि अर्पण करें और स्वयं भी पीले आसन पर बैठ जाएं.

- अपने दाएं हाथ में जल लेकर घर मे धन धान्य की बरकत के लिए भगवान विष्णु के सामने संकल्प लें.

- यदि सम्भव हो तो पूरा दिन निराहार रहकर शाम के समय कामिका एकादशी की व्रत कथा सुनें और फलाहार करें

- शाम के समय भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने एक गाय के घी का दीपक जलाएं

- अब दूसरे दिन सुबह ब्राह्मणों को भोजन कराकर तथा दक्षिणा देकर उसके बाद स्वयं खाना खाना चाहिए |

व्रत कथा

युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से पूछा कि हे प्रभु श्रावण के कृष्ण पक्ष में कौन सी एकादशी होती है. उसका वर्णन करें और कृपा करके उसकी कथा सुनाएं . कृष्ण ने कहा, राजन सुनों मैं तुम्हें कथा सुनाता हूं.

एक नगर में एक ठेठ ठाकुर और एक ब्राह्मण रहते थे. दोनों की एक दूसरे से बनती नहीं थी. आपसी झगड़े के कारण ठाकुर ने ब्राह्मण को मार डाला. इस पर नाराज ब्राह्मणों ने ठाकुर के घर खाना खाने से मना कर दिया. ठाकुर अकेला पड़ गया और वह खुद को दोषी मानने लगा. ठाकुर को अपनी गलती महसूस हुई और उसने एक मुनी से अपने पापों का निवारण करने का तरीका पूजा. इस पर, मुनी ने उन्हें कमिका एकदशी का उपवास करने के लिए कहा. ठाकुर ने ऐसा ही किया. ठाकुर ने व्रत करना शुरू कर दिया. एक दिन कामिका एकादशी के दिन जब ठाकुर भगवान की मूर्ति के निकट सोते हुए एक सपना देखा, भगवान ने उसे बताया, “ठाकुर, सभी पापों को हटा दिया गया है और अब आप ब्राह्मण हटिया के पाप से मुक्त हैं”. इसलिए, इस एकादशी को आध्यात्मिक साधकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह चेतना से सभी नकारात्मकता को नष्ट करता है और मन और हृदय को दिव्य प्रकाश से भर देता है.

कामिका एकादशी व्रत का तीन दिन का नियम होता है. यानी दशमी, एकादशी और द्वादशी को कामिका एकादशी के नियमों का पालन होता है. इन तीन दिनों के दौरान जातकों को चावल नहीं खाने चाहिए. इसके साथ ही लहसुन, प्याज और मसुर की दाल का सेवन वर्जित है. मांस और मदिरा का सेवन भूल कर भी नहीं करना चाहिए.

इस बार कामिका एकादशी का व्रत 28 जुलाई, रविवार को किया जाएगा. श्रावण मास में आने के कारण इस व्रत का महत्‍व और बढ़ गया है.

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