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Friday, 2 August 2019

हरियाली तीज 2019 का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और व्रत कथा


हरियाली तीज 2019 का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और व्रत कथा

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श्रावण के महीने में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज या श्रावणी तीज मनाया जाता है। मुख्य रूप से यह त्योहार उत्तर भारत में मनाया जाता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में तो इस त्योहार को कजली तीज के रूप में भी मनाते हैं। यह त्योहार 3 अगस्त 2019 को है। महिलाओं के इस त्योहार में जब प्रकृति हरियाली की चादर ओढ़ी होती है तो सभी के मन में मोर नाचने लगते हैं। जहां एक ओर पेड़ों की डालों में झूले डाले जाते हैं तो वहीं दूसरी ओर यह व्रत सुहागन स्त्रियों के लिए बहुत जयादा महत्वपूर्ण होता है। आस्था, सौंदर्य और प्रेम से भरा यह उत्सव भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। चारों ओर हरियाली होने की वजह से इसे हरियाली तीज भी कहा जाता है। बताते चलें कि इस अवसर पर महिलाएं झूला झूलती हैं, गाना गाती हैं और खुशियां मनाती हैं।

हरियाली तीज व्रत की पूजन विधि 

हरियाली तीज का व्रत करने वाली महिलाओं को प्रात: काल ही उठ कर स्नानध्यान कर लेना चाहिए। उसके बाद पूजा करने का संकल्प लेकर 'उमामहेश्वरसायुज्य सिद्धये हरितालिका व्रतमहं करिष्ये' मंत्र का जाप करना चाहिए। बता दे कि पूजा शुरू करने से पहले काली मिट्टी से भगवान शिव और मां पार्वती व भगवान गणेश की मूर्ति को बनाना चाहिए। फिर थाली में सुहाग की सामग्रियों को एकत्रित कर व सजाकर माता पार्वती को चढ़ाना चाहिए। जिसके बाद भगवान शिव को वस्त्र चढ़ाकर तीज व्रत की कथा सुननी या पढ़नी चाहिए।

हरियाली तीज व्रत की कथा 



हरियाली तीज व्रत की एक पौराणिक कथा है। जिसके अनुसार भगवान शिव एक दिन माता पार्वती को अपने मिलने की कथा सुनाते हैं। भगवान शिव माता पार्वती को बताते हैं कि तुमने मुझे अपने पति के रूप में पाने के लिए 107 बार जन्म लिया, लेकिन तुम मुझे अपने पति के रूप में एक भी बार नही पा सकी। फिर जब 108वीं बार तुमने पर्वतराज हिमालय के घर जन्म लिया तो तुमने मुझे अपने वर के रूप में पाने के लिए हिमालय पर घोर तपस्या की। और उस तपस्या के दौरान तुमने अन्न-जल का भी त्याग कर दिया था। और सूखे पत्तों चबाकर तुम पूरा दिन बिताती थी। बिना मौसम की परवाह किए हुए तुमने निरंतर तप किया। तुम्हारे पिता तुम्हारी ऐसी स्थिति देखकर बहुत दुखी व नाराज थे। लेकिन फिर भी तुम वन में एक गुफा के अंदर मेरी आराधना में लीन रहती थी। भाद्रपद के महीने में तृतीय शुक्ल को तुमने रेत से एक शिवलिंग बनाकर मेरी आराधना की जिससे खुश होकर मैने तुम्हारी मनोकामना पूरी की। जिसके बाद तुमने अपने पिता से कहा कि 'पिताजी, मैंने अपने जीवन का काफी लंबा समय भगवान शिव की तपस्या में बिता दिया है। और अब भगवान शिव ने मेरी तपस्या से प्रसन्न होकर मुझे स्वीकार भी लिया है। इसलिए अब मैं आपके साथ तभी चलूंगी जब आप मेरा विवाह भगवान शिव के साथ ही करेंगे। जिसके बाद पर्वतराज ने तुम्हारी इच्छा स्वीकार कर लिया और तुम्हें घर वापस ले गए। कुछ समय बाद ही उन्होंने पूरे विधि विधान के साथ हमारा विवाह करा दिया। शिव जी कहते हैं कि हे पार्वती! भाद्रपद शुक्ल तृतीया को तुमने मेरी आराधना करके जो व्रत किया था यह उसी का परिणाम है जो हम दोनों का विवाह संभव हो सका। शिव जी ने पार्वती जी से कहा कि इस व्रत का महत्त्व यह है कि इस व्रत को पूरी निष्ठा से करने वाली प्रत्येक स्त्री को मैं मनवांछित फल देता हूँ। इतना ही नही भगवान शिव ने पार्वती जी से कहा कि जो भी स्त्री इस व्रत को पूरी श्रद्धा से करेंगी उसे तुम्हारी तरह अचल सुहाग की प्राप्ति होगी।

हरियाली तीज पर्व की तिथि व मुहूर्त 

हरियाली तीज 2019 - 3 अगस्त 
तृतीया तिथि - शनिवार, 3 अगस्त 2019 
तृतीया तिथि प्रारंभ - 01:36 बजे (3 अगस्त 2019)
 तृतीया तिथि समाप्त - 22:05 बजे (3 अगस्त 2019)

हरियाली तीज के मंत्र  

1. गण गौरी शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकर प्रिया। मां कुरु कल्याणी कांत कांता सुदुर्लभाम्।। 
2.श्री भगवते साम्ब शिवाय नमः 
3.उमामहेश्वरसायुज्य सिद्धये हरितालिका व्रतमहं करिष्ये 
4.देवि देवि उमे गौरी त्राहि माम करुणा निधे, ममापराधा छन्तव्य भुक्ति मुक्ति प्रदा भव

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