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Friday, 17 July 2020

कब है रक्षाबंधन का त्योहार, जानिए तारीख, शुभ मुहूर्त और इसका महत्व




रक्षाबंधन का त्योहार अगले महीने 03 अगस्त को मनाया जाएगा. रक्षाबंधन हिन्दू कैलेंडर के अनुसार श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है. इसे आमतौर पर भाई-बहनों का पर्व मानते हैं लेकिन, अलग-अलग स्थानों एवं लोक परम्परा के अनुसार अलग-अलग रूप में भी रक्षाबंधन का पर्व मानया जाता है. रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के अटूट रिश्ते को दर्शाता है. रक्षाबंधन का त्योहार सदियों से चला आ रहा है. इसे भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक का पर्व कहा जाता है. रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाई की कलाई में रक्षा सूत्र बांधती हैं. हिंदूओं के लिए इस त्योहार का विशेष महत्व होता है. आइए जानते हैं इस साल रक्षाबंधन का त्योहार कब मनाया जाएगा और इस पर्व का मुहूर्त क्या रहेगा...

रक्षाबंधन का त्योहार इस साल 03 अगस्त दिन सोमवार को मनाया जाएगा. यह त्योहार हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि के दिन मनाया जाता है. इस बार यह तिथि 03 अगस्त के दिन पड़ रही है.

रक्षाबंधन शुभ मुहूर्त 2020

रक्षाबंधन अनुष्ठान का समय- सुबह 09 बजकर 28 मिनट से रात 09 बजकर 14 मिनट तक
अपराह्न मुहूर्त- दोपहर 01 बजकर 46 मिनट से शाम 04 बजकर 26 मिनट तक
प्रदोष काल मुहूर्त- शाम 07 बजकर 06 मिनट से रात 09 बजकर 14
मिनट तक
पूर्णिमा तिथि आरंभ – 02 अगस्त की रात 09 बजकर 28 मिनट से प्रारंभ होगा
पूर्णिमा तिथि समाप्त- 03 अगस्त की रात 09 बजकर 27 मिनट पर

रक्षाबंधन का विशेष महत्व





रक्षाबंधन के दिन सुबह-सुबह उठकर स्नान करें और साफ-सुथरें कपड़े पहनें. इसके बाद घर की साफ-सफाई करें. चावल के आटे का चौक पूरकर मिट्टी के छोटे से घड़े की स्थापना करें. चावल, कच्चे सूत का कपड़ा, सरसों, रोली को एकसाथ मिलाएं. फिर पूजा की थाली तैयार कर दीप जलाएं. थाली में मिठाई रखें. इसके बाद भाई को पीढ़े पर बिठाएं. अगर पीढ़ा आम की लकड़ी का बना हो तो सर्वश्रेष्ठ है.
रक्षा सूत्र बांधते वक्त भाई को पूर्व दिशा की ओर बिठाएं. वहीं भाई को तिलक लगाते समय बहन का मुंह पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए. इसके बाद भाई के माथा पर टीका लगाकर दाहिने हाथ पर रक्षा सूत्र बांधें. राखी बांधने के बाद भाई की आरती उतारें फिर उसको मिठाई खिलाएं. अगर बहन बड़ी हो तो छोटे भाई को आशीर्वाद दें और छोटी हो तो बड़े भाई को प्रणाम करें.

रक्षाबंधन पर्व का धार्मिक महत्व

पौराणिक कथा के अनुसार, राजसूर्य यज्ञ के समय भगवान कृष्ण को द्रौपदी ने रक्षा सूत्र के रूप में अपने आंचल का टुकड़ा बांधा था. इसी के बाद से बहनों द्वारा भाई को राखी बांधने की परंपरा शुरू हो गई. रक्षाबंधन के दिन ब्राहमणों द्वारा अपने यजमानों को राखी बांधकर उनकी मंगलकामना की जाती है. इस दिन विद्या आरंभ करना भी शुभ माना जाता है.

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